दुनिया में तो हंसता नजर आता है हर इंसान
दुनिया में तो हंसता नजर आता है हर इंसान, दिलों में तो दु:खो का ही आवास होगा। रेगिस्तान में पानी नहीं हर तरफ रेत ही होगी, तुम्हे सिर्फ मरीचिका का आभास होगा । लाखों दर्द छिपाएं होंगे सीने में दुनियादारी के, पर दिखाने को चेहरों पर उल्लास होगा। पहचानना हो तो सबको सुनाना दुख अपना! सिर्फ तुम्हारा अपना ही तुम्हारे पास होगा। पहली बारिश जब मिलेगी बंजर धरती से, तब खत्म उसका निर्जला उपवास होगा। बातें इंसानियत की हो और तेरा ज़िक्र ना हो, ये तो सीधा मानवता का उपहास होगा। ये भोलापन ही है तुम्हारे शोषण का कारण! कहो तुम्हें कब इसका एहसास होगा। जिससे मिलता हूं तेरी ही बातें करता है यहां, जरूर तुझमें कुछ न कुछ ख़ास होगा। ~~~~~~~~~~~~~~~