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"गलतफहमी"

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शायद थोड़े व्यस्त है दुनिया की आपा धापी मे,  पर कभी ऐसा ना कहना कि, तुम्हे तो प्यार नही है। थकी हुई,निढाल युं करती नाउम्मीदी की तपती गर्मी में,  इस दिल को जो ठंडक पहुँचाए,तुम सी शीतल बयार नहीं है। मै तुमसे हुं,तुम मेरे लिए सब हो, फिर ऐसा क्यों सोचते हो,  कि तुम्हे आँखों में रचाया तो है, मगर तुम्हारी दरकार नहीं है। जिसकी एक झलक पाने को , ये आँखें तरसा करती हैं,  क्यु लगता हैं तुमसे मिलने का, दिल को इन्तज़ार नहीं है। अपने दिल का सुकून लुटाकर, फ़िक्र तुम्हारी करते है,  फिर भी ये कोई लेन – देन , या कोई व्यापार नहीं है। हर रोज़ ख्वाबों में आते हो , सारी सारी रात जगाते हो,  कैसे कहूँ मेरे पास तुम्हारा कोई समाचार नहीं है। बात-बात पर रूठना, मान जाना तुम्हारा अच्छा लगता है,  बस ये ना कहना कि, तुम्हारे रूठने का मुझे ज़ार नहीं है। एक दिल ही था मेरा अपना वो भी तुमको सौंप दिया है,  अब लगता हैं, समय रुक गया है, वक्त में रफ्तार नहीं है। जो तुम नही तो आँखे प्यासी, हर तरफ कुछ कमी है,  उथल पुथल है जेहन मे सारी, सपनों का आकार नही है ...............................