बुरा है वो मगर इतना नहीं है
सारी शिकायते आज यूँ ही दूर हो गई, ख़ुश हूँ कि मुझे कोई शिक़वा नहीं है। ना जाने दिल क्यू समझाने लगा है कि, लगता हैं बुरा है वो मगर इतना नहीं है। कुछ भी बोला नही वो मुझसे पूछने पर भी, मुझे यकीन क्यू मगर कि वो झूठा नहीं है। गलतफहमियां ही थी जो दूरी आयी थी, वो मानता है कि ये रिश्ता अभी टूटा नही हैं। आँखें तो हर पल तकती थी दरवाजे को, ये तो दोस्त बताते थे कि वो आया नही है। उसके बिना कुछ यूँ लगता था कि, कड़ी धूप में साथ मेरा साया नही है। दिलों के रिश्तों में मुश्किल है बस ये, इसे कोई अपना लगा तो छुटता नहीं है। मुहब्बत कुछ इस क़दर हो गई थी उससे कि तन्हाई में भी लगता था, तन्हा नहीं है। चल क्यु ना चले जाए किसी ऐसी जगह, जहाँ इस रिश्ते पर दुनिया का पहरा नहीं है। तु आ गया है ना, मरहम की जरूरत नहीं, कि दिल पर लगा जख्म गहरा नही है। _______________