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बुरा है वो मगर इतना नहीं है

 सारी शिकायते आज यूँ ही दूर हो गई,  ख़ुश हूँ कि मुझे कोई शिक़वा नहीं है।  ना जाने दिल क्यू समझाने लगा है कि,  लगता हैं बुरा है वो मगर इतना नहीं है।  कुछ भी बोला नही वो मुझसे पूछने पर भी,  मुझे यकीन क्यू मगर कि वो झूठा नहीं है।  गलतफहमियां ही थी जो दूरी आयी थी,  वो मानता है कि ये रिश्ता अभी टूटा नही हैं।  आँखें तो हर पल तकती थी दरवाजे को,  ये तो दोस्त बताते थे कि वो आया नही है।  उसके बिना कुछ यूँ लगता था कि,  कड़ी धूप में साथ मेरा साया नही है।  दिलों के रिश्तों में मुश्किल है बस ये,  इसे कोई अपना लगा तो छुटता नहीं है।  मुहब्बत कुछ इस क़दर हो गई थी उससे कि तन्हाई में भी लगता था, तन्हा नहीं है।  चल क्यु ना चले जाए किसी ऐसी जगह,  जहाँ इस रिश्ते पर दुनिया का पहरा नहीं है।  तु आ गया है ना, मरहम की जरूरत नहीं,  कि दिल पर लगा जख्म गहरा नही है।  _______________

"सोच"

 तुम सोच रहे थे बस, रेगिस्तानों के वीरानो तक, मेरी तो नजरे हैं बरसते बादलों के ठिकानों तक। साज तो हवा के झोंके, पानी के बहाव में भी है, लोग क्यों उलझे रहते है ग़ज़लों और तरानों तक। कुछ तो मिट्टी के सौंधेपन, फूलों की महक में है, जो खींच लाती हैं हमें आज भी बागबानों तक। सबके सपनों की एक लम्बी कहानी होती है, शीशे के महलो से लेकर मिट्टी के मकानों तक। एक ऎसी अदालत भी है, जो ईमान परखती है, सिमटी नहीं रहती सिर्फ़ गवाहों और बयानों तक। ये दिल समझा नहीं करता अहसासों की बोली को,  नहीं लाना चाहते हम लफ़्ज़ों को ज़ुबानों तक। हर वक़्त हवाओं में, महसूस तो करोगे तुम, ये प्यार की ख़ुशबू है जनाब, महकेंगी ज़मानों तक। ~~~~~~~~~~