THE ART OF HAPPINESS


Finished this book few days ago. actually I am not that kind of reader who read a religious book or the book who teaches about what is life , lessons and all . but I really surprised that I loved the book! This book taught me lessons about life , how to be happy , how to turn every negativity into positivity, how to handle a lot of things and the most important thing that I learnt from this book is discipline and how to be compassionate ! I am trying here to summarise this book in very few words... Hope you will like my effort. 

THE ART OF HAPPINESS

~by Dalai Lama & Howard Cutler

BOOK SUMMARY

   आमतौर पर हम सब खुशियां, अपने दोस्तों में, family में, office में, business में, यानी कि external factors में ढूंढते हैं। जबकि खुशियों का source, external नहीं internal होता है। लेकिन जब हमारा मन अशांत होता है। तो हमको खुशियां कहीं नहीं मिलती।


      Happiness is a state of mind, जो internal factors से आती है, external से नहीं। इसलिए अगर mind को trained कर लिया जाए। तो इंसान हर हाल में खुश रह सकता है। External factor से कुछ देर के लिए खुशी मिल सकती है। लेकिन अगर आप अंदर से खुश नहीं हैं। तो फिर आपको कोई भी चीज खुशी नहीं दे सकती। जिस इंसान ने अपने mind को trained कर लिया। वह बड़ी से बड़ी परेशानी में भी खुश रह सकता है, Positive रह सकता है। लेकिन जिसको रोना है। उसके लिए छोटे से छोटा reason भी काफी है। 


     Happiness और Sadness का सारा खेल external factors व चीजों से नहीं, बल्कि हमारे thoughts, हमारी mental state से जुड़ा होता है। इसलिए दिमाग को यह training बहुत जरूरी है। 


 This Book is all about, कैसे हम constantly, अपने negative thoughts को eliminate करें। इसकी जगह positive thoughts को develop करें, जो आपको हर हाल में खुश रहने की strength दे।


 The art of happiness इस book के writer Howard Cutler एक Psychiatrist भी हैं। उन्होंने 14th दलाई लामा का इंटरव्यू किया। यह जानने की कोशिश की, दलाई लामा ने शांति और खुशी कैसे प्राप्त की। यह book उसी interview के बारे में है।


The Right To Happiness

  दलाई लामा का मानना है कि हमारी life का असली motive खुश रहना है। चाहे हम लोग किसी भी धर्म को माने, हम सब अपनी life को बेहतर बनाना चाहते हैं। 

 जो लोग खुश रहते हैं। वह उन लोगों से ज्यादा loving और forgiving होते हैं, जो खुश नहीं रहते। For example, अगर हम traffic में फंसे हैं। पूरे 20 मिनट इंतजार करने के बाद, finally सभी गाड़ियां थोड़ा आगे बढ़ती हैं। तभी हम देखते हैं कि हमारे बराबर में गाड़ी चलाता हुआ व्यक्ति हमारी lane में आना चाहता है। अगर हम अच्छे mood में होंगे, तो ज्यादा chance हैं कि हम अपनी गाड़ी को रोककर उस व्यक्ति को अपनी lane में आने देंगे। लेकिन अगर हमारा mood अच्छा नहीं है। तो हम सोचेंगे कि मैं इतनी देर से आगे बढ़ने का इंतजार कर रहा हूँ तो फिर उस व्यक्ति को आगे बढ़ने का मौका क्यों दूं। ये सोचकर हम तेजी से अपनी lane में आगे बढ़ जाएंगे। 

मतलब जब हम खुश रहते हैं। तब हम खराब situation में भी खुद को और खुद के आसपास के environment को positive रखते है। जैसे-जैसे हम अपनी life के उन factors को समझने लगते हैं। जो हमारी life में खुशियां लाते हैं। वैसे-वैसे हमें यह भी automatically समझ में आ जाता है। हमारा खुश रहना, सिर्फ हमारे लिए ही नहीं। बल्कि हमारी family और पूरी sociaty के लिए भी अच्छा है।


The Path To Happiness

  ख़ुद खुश रहने के लिए सबसे पहला step Learning है। Learning यानी सबसे पहले हमें यह सीखना होगा, किस तरह negative emotions हमारे लिए नुकसानदायक होते हैं। इसके साथ ही positive emotions, हमारे लिए किस तरह helpful होते हैं। 

    Negative emotions सिर्फ, हमारे लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक है। अगर हम इस बात को समझ लेते हैं। तो हम खुद को बदलने की ओर पहला कदम उठाते हैं Hatred, jealousy, anger इस तरह के सभी negative emotions हमारी खुशियों को कुचल देते हैं। फिर इसी वजह से हमारे अंदर fear, hesitation और insecurity जैसी feelings आती हैं। हम अपने आपको, बहुत अकेला महसूस करने लगते हैं। 

वहीं, दूसरी ओर kindness और love जैसे positive emotions के साथ हम अपनी life को खुश रहकर जी सकते हैं। फिर यह पूरी दुनिया, हमें हमारी जैसी ही लगेगी। तब हम अपने आपको इस दुनिया के साथ जुड़ा हुआ महसूस करेंगे। इसी के साथ fear, hesitation और insecurity जैसी feeling भी अपने आप खत्म हो जाएंगी। लोग आप पर पहले से ज्यादा विश्वास करने लगेंगे। इससे भी ज्यादा जरूरी आप psychologically और भी ज्यादा healthy हो जाएंगे।


Mental Discipline

  जिस तरह body को healthy रखने के लिए, बहुत सारे vitamins और nutrients की जरूरत होती है। उसी तरह हमेशा खुश कैसे रहना सीखने के लिए भी बहुत सी methods की जरूरत होती है। अगर हम negative emotions को overcome करना चाहते हैं। तो सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि यह काम किसी एक technique को, सिर्फ एक-दो बार practice करने से नहीं होगा। 


    उदाहरण के लिए, जब हम एक climate से दूसरे climate में जाते हैं। तो हमारे शरीर को नए environment को adapt करने में कुछ समय लगता है। ठीक उसी तरह, जब हम अपने mind को एक negative से positive mental state में transform करते हैं। तो उसमें भी थोड़ा-सा समय लगता है।


     हमें रोज सुबह उठकर, खुद से कहना चाहिए। मैं आज के दिन को waste नहीं होने दूंगा। पूरा दिन एक positive approach के साथ पहले से बेहतर तरीके से जियूँगा। फिर रात को सोने से पहले, हमें अपने आपसे पूछना होगा। क्या मैंने आज का दिन वैसे ही बिताया। जैसा मैंने सोचा था। इस प्रक्रिया को रोज करते हुए। धीरे-धीरे आप अपने mind के positive aspect को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। शुरुआत में positivity आपको negativity के सामने बहुत छोटी लगेगी। लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे negative behavior आपकी life से अपने आप ही गायब होने लगेंगे। यह तो सच है कि चाहे हम कोई भी activity करें, इस दुनिया में कोई भी ऐसा काम नहीं है। जिसे Training और Discipline से आसान न बनाया जा सके। Training और Discipline की मदद से, हम खुद में बड़े-बड़े changes ला सकते हैं।


Ethical Discipline

  Ethical Behaviour और inner discipline, दोनों ही हमारी life को बेहतर बनाते हैं। इन दोनों को मिलाकर, जो शब्द बनता है। उसे ही ethical discipline कहते है। यहां discipline का मतलब है, Self discipline जो हमें अपने negative qualities को overcome करने के लिए ही apply करना चाहिए।


Importance of Education in Life

   अगर हमें किसी भी समस्या का समाधान निकालना होता है। तो हमारी knowledge ही हमारे काम आती है। इस knowledge को प्राप्त करने के अलग-अलग levels होते हैं। एक बात तो साफ है। जितनी अच्छी हमारी knowledge होगी। उतने ही अच्छे से, हम अपनी life को जिएंगे।


      हमें अपने behavior के long-term और short-term, consequences को भी compare करना आना चाहिए। उदाहरण के लिए, गुस्सा तो सभी प्राणियों का आता है। लेकिन जंगली जानवरों को यह नहीं पता होता। गुस्सा उनके लिए हानिकारक है। हम इंसानों को यह बात पता होती है। गुस्सा हमारे लिए हानिकारक है। क्योंकि हमारे पास इस बात की knowledge है।


      इसी तरह जितना ज्यादा हम जानेंगे कौन-सी चीजे हमारे जीवन में खुशियां लाती है, कौन-सी चीजें दुख लाती है। उतने ही ज्यादा अच्छे तरीके से, हम अपनी life को जिएंगे। यह सब जानने के लिए ही, हमें education की जरूरत होती है। इसीलिए education की हमारी life में इतनी important है। लेकिन आज के समाज में एक समस्या यह भी है कि लोग समझते हैं कि Education हमें सिर्फ चालाक बनाने में काम आती है। कभी-कभी यह भी मान लेते हैं। जो व्यक्ति educated नहीं होता या कम educated होता है। वह ज्यादा ईमानदार होता है। अभी तक हमारे समाज ने इस बात को, पूरी तरह से नहीं समझा है। Knowledge और education का असली काम है। हमारी life में discipline लाना। जब हम अपने intelligence से खुद को अंदर से बदलते हैं। तभी हम अपनी knowledge का सही इस्तेमाल कर पाते हैं।


What is Spirituality ?

  बहुत से लोग नास्तिक होते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है। कि वो लोग अध्यात्मिक नहीं हो सकते। दलाई लामा कहते हैं कि यह महत्वपूर्ण नहीं है, कि What is your religion or do you believe in any। दलाई लामा basic Spirituality में believe करते हैं। Basic अध्यात्मिकता में जो चीजें आती है। वह हैं kindness, एक अच्छा इंसान बनना, और एक-दूसरे की परवाह करना। 


     Problems से deal करने का हर व्यक्ति का अपना-अपना तरीका होता है। हो सकता है उनमें से कोई भी तरीका न गलत हो, न सही हो। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति के आध्यात्मिक होने का मतलब यह हो सकता है। वह हर चीज के पीछे, छिपे मतलब को ढूंढे। चाहे परिस्थिति अच्छी हो या खराब दोनों से ही कुछ न कुछ सीखें।ताकि वह उस सीख को अपने और दूसरों के भले के लिए इस्तेमाल कर सकें। तो हमें भी खुद से, यही पूछना चाहिए कि हमारे लिए आध्यात्मिक होने का मतलब क्या है। अगर दूसरा व्यक्ति, हमें अध्यात्मिकता का मतलब समझाता है। तो हमे उसकी बात का सीधा सीधा सच नहीं मान लेना है। बल्कि खुद से सवाल पूछकर उस बात को समझने की कोशिश करनी है। 


Change is The Only Constant

  जब दलाई लामा से दुख के बारे में पूछा गया। तो उन्होंने यह बताया कि लोग एक बहुत बड़ी गलती यह कर देते हैं। वह दुख को अस्वाभाविक समझ लेते हैं। जबकि दुख जीवन का एक हिस्सा है। लेकिन लोग इस बात को अस्वीकार कर देते हैं। खुद को पीड़ित बताकर, किसी और को दोषी ठहराने लगते हैं।जबकि असलियत में कोई दोषी होता ही नहीं है। 

केवल एक ही चीज है। जो स्थाई होती है, वह है change। इसका मतलब यह है कि हमें Past की बातों को, पीछे छोड़ देना सीखना होगा। बदलाव का विरोध करना ही, दुख का मूल कारण होता है। एक बार अगर हमने change को accept कर लिया। तो हम खुलकर उसे संबोधित कर सकते हैं।हम उसका मतलब समझ सकते हैं। उससे कुछ सीख सकते हैं। 


लोग चोट लगने पर खुद की या दूसरों की निंदा करने लगते हैं। किसी काम के लिए, देर तक लाइन में खड़ा होना पड़े तो परेशान होकर सरकार की निंदा करने लगते हैं। अगर उनके किसी प्रिय व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसके बाद, वह घंटों तक रोते हैं। लेकिन जब वह बदलाव को स्वीकार कर लेते हैं तब उनकी प्रगति होती है। तभी वह शांत होते हैं और परिस्थिति को बदलते हैं। यही वह राह होती है। जो उन्हें खुशी की तरफ ले जाती है।



Be Honest About Your Limits

  Self confidence को बढ़ाने के लिए, बहुत से अलग-अलग तरीके होते हैं। उनमें से ज्यादातर तरीके ऐसे होते हैं। जिनमें हम खुद को चुनौती देते हैं। लेकिन दलाई लामा का view इससे बहुत अलग है। वह कहते हैं कि हमें अपनी limitations का पता होना चाहिए। हमें अपने और दूसरे लोगों के के साथ, इस बात को लेकर honest रहना चाहिए। हम क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते हैं। अगर हम इस बात को जानकर संतुष्ट है कि हम सब कुछ नहीं कर सकते हैं। तो हम इस बात को सबके सामने भी मान सकते हैं। बाहर से आत्मविश्वास लाने के बजाए। हम सच्चाई के रास्ते पर चलकर, अंदर सही से ही आत्मविश्वास ला सकते हैं। अगर हमें किसी की कोई बात समझ नहीं आती है। तो हमें उस व्यक्ति को बताना चाहिए। हमें उसकी बात समझ नहीं आई। ताकि वो हमें दोबारा समझाए।


 अपनी limitations के साथ संतुष्ट होने से पहले, यह जानना पड़ेगा। हमारी limitations क्या है। इसके लिए आत्म जागरूकता की जरूरत होती है। तब हमें self analysisकरना होगा। यानी हमें यह जानना होगा कि कौन-सा काम, हम ज्यादा अच्छे से कर पाते हैं। कौन-सा काम, हम अच्छे से नहीं कर पाते है। हमें अपनी ताकतों को पहचान कर, उन्हें बढ़ाना होगा। हमेशा खुद के और दुनिया के साथ ईमानदार रहना होगा।

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