"ख़्वाहिशें"

 कभी बैठ कर सोचता हूं तो ये लगता है कि

मुश्किल तो हो गए कुछ काम आसान बाक़ी है


उम्मीदें कायम है अभी हौसले ज़िंदा है

बुलंदी पर पहुँचने का अभी अरमान बाक़ी है


है दूर अब आदमी इंसानियत और नातों से

इस मशीनी दौर में बस नाम का इंसान बाक़ी है


सजा रखे हैं बहुत से रंगीन सपने इन आँखों में

पर अब भी सजावट का बहुत सामान बाक़ी है


गुजार सकु फुरसत के कुछ हसीं लम्हे उनके साथ

ऐसे दर ओ दीवार, और वो मकान बाक़ी है


कहाँ ले चल दिए लोग यू जनाजा उठा कर

अभी तो धड़कता है दिल, अभी जान बाक़ी है


सुनाता हूँ ज़रा ठहरो सच्चाई इस ज़िन्दगी की

बहुत से दे दिए मगर कुछ इम्तेहान बाक़ी है


अब भी कोई हैं जो उसूलों पर जो चलता हैं

अब भी कुछ लोग हैं जिनके अभी ईमान बाक़ी है


जानने लगे है अब मुझे भी लोग दुनिया में

मगर ख़ुद से ख़ुद की इक पहचान अभी बाक़ी है


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