ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है

कभी उजली सुबह, तो कभी शाम ढलती सी लगती है

कभी ठहरी सी जमीं, कभी घड़ी निरंतर चलती सी लगती है

ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है... 


कभी हरी-भरी धरती सी, तो कभी खुला आसमान लगती है।

कभी हर सुख चैन मिल गया हो जैसे, तो कभी अधूरा काम लगती है।

ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है... 



कभी कल कल बहती नदी, तो कभी गहरा समन्दर लगती है।

कभी ख़ौफ़नाक आंधी, तो कभी बयार निश्चल सुंदर लगती है।

ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है... 


कभी मंदिर की घंटियों सी, कभी दूर कही उठती अजान लगती है।

कभी परिन्दे की ऊँची उड़ान, तो कभी पंछी घायल बेजान लगती है।

ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है... 


 कभी आँख से छलका आँसू, कभी होंठो पे तैरती मुस्कान लगती है।

 कभी हवेली कोई शानदार, तो कभी खेतों में कच्चा मकान लगती है।

 ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है... 

 

कभी मीरा सी बैरागन, तो कभी राधा सी प्रेम दीवानी लगती है।

कभी सड़कों पर फिरती आवारा सी, कभी लड़की खानदानी लगती है।

ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है... 


कभी कंपकपाती सर्दियाँ, तो कभी हल्की खिली धूप लगती है।

कभी बाग के फूलों पर तितलियों सी इठलाती बहुत खूब लगती है।

ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है... 


कभी पुरी हो चुकी हसरत सी, तो कभी अधूरा सपना लगती है।

कभी कोई शख़्स अनजान सा, कभी कोई करीबी अपना लगती है।

ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है... 


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