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तू किसी रेल सी गुज़रती है

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  तू किसी रेल सी गुज़रती है - Tu Kisi Rail Si Guzarti Hai Movie/Album: मसान (2015) Music By: इंडियन ओशन Lyrics By: वरुण ग्रोवर  Performed By: स्वानंद किरकिरे https://youtu.be/zpf8hrbT2d0 तू किसी रेल सी गुज़रती है मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ तू भले रत्ती भर ना सुनती हो मैं तेरा नाम बुदबुदाता हूँ किसी लम्बे सफर की रातों में तुझे अलाव सा जलाता हूँ काठ के ताले हैं, आँख पे डाले हैं उनमें इशारों की चाबियाँ लगा रात जो बाकी है, शाम से ताकी है नीयत में थोड़ी खराबियाँ लगा मैं हूँ पानी के बुलबुले जैसा तुझे सोचूँ तो फूट जाता हूँ तू किसी रेल सी गुज़रती है मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ Live concert version by INDIAN OCEAN'S Rahul Ram I watched Masaan  two days ago on Netflix and I can really say that it's a beautiful movie with all its implications and immersions in Indian society. its colors, joys, disappointments, hopes, arrivals and departures, but at the same time it touches all the people of our immense world. Great Movie, Great Songs, Great Talents, Great Voices. Greetings to all, ...

" ये न पूछिए मुझसे कि क्या कर रहा हूँ "

 ये न पूछिए मुझसे कि क्या कर रहा हूँ आज एक बार फिर कुछ नया लिख रहा हूँ भीड़ भरी सड़कों पर इस अनजान शहर में लोगो को आज कुछ अलग सा दिख रहा हूं बहुत खाये है धोखे हर मोड़ पर यहां दगाबाजो से फिर भी वफा कर रहा हूँ खत्म हुआ शराफ़त का किस्सा अब अपनी मासूमियत भी दफा कर रहा हूँ बनाते हो मुँह क्यों सिकोडी हैं भौंहें कहो क्या मैं कुछ बुरा कर रहा हूँ देखे हैं जो सपने कई रातों को जागकर मैं बस अब उन्हें ही पूरा कर रहा हूँ चल रहा था मैं खुद जिस उल्टे रास्ते इंसानियत के नाते दूसरों को मना कर रहा हूं इस खुदगर्ज दुनिया को देख कर लगता है इस ज़िन्दगी को बेवजह फना कर रहा हूं बुजुर्गों के कदमों में सिर को झुका कर दुआओं की ये दौलत जमा कर रहा हूँ जलकर ही सही दूसरों के काम आऊ इसीलिए अंदर की आग को शमा कर रहा हूं ~~~~~~~~~