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"गलतफहमी"

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शायद थोड़े व्यस्त है दुनिया की आपा धापी मे,  पर कभी ऐसा ना कहना कि, तुम्हे तो प्यार नही है। थकी हुई,निढाल युं करती नाउम्मीदी की तपती गर्मी में,  इस दिल को जो ठंडक पहुँचाए,तुम सी शीतल बयार नहीं है। मै तुमसे हुं,तुम मेरे लिए सब हो, फिर ऐसा क्यों सोचते हो,  कि तुम्हे आँखों में रचाया तो है, मगर तुम्हारी दरकार नहीं है। जिसकी एक झलक पाने को , ये आँखें तरसा करती हैं,  क्यु लगता हैं तुमसे मिलने का, दिल को इन्तज़ार नहीं है। अपने दिल का सुकून लुटाकर, फ़िक्र तुम्हारी करते है,  फिर भी ये कोई लेन – देन , या कोई व्यापार नहीं है। हर रोज़ ख्वाबों में आते हो , सारी सारी रात जगाते हो,  कैसे कहूँ मेरे पास तुम्हारा कोई समाचार नहीं है। बात-बात पर रूठना, मान जाना तुम्हारा अच्छा लगता है,  बस ये ना कहना कि, तुम्हारे रूठने का मुझे ज़ार नहीं है। एक दिल ही था मेरा अपना वो भी तुमको सौंप दिया है,  अब लगता हैं, समय रुक गया है, वक्त में रफ्तार नहीं है। जो तुम नही तो आँखे प्यासी, हर तरफ कुछ कमी है,  उथल पुथल है जेहन मे सारी, सपनों का आकार नही है ...............................

ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है

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कभी उजली सुबह, तो कभी शाम ढलती सी लगती है कभी ठहरी सी जमीं, कभी घड़ी निरंतर चलती सी लगती है ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है...  कभी हरी-भरी धरती सी, तो कभी खुला आसमान लगती है। कभी हर सुख चैन मिल गया हो जैसे, तो कभी अधूरा काम लगती है। ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है...  कभी कल कल बहती नदी, तो कभी गहरा समन्दर लगती है। कभी ख़ौफ़नाक आंधी, तो कभी बयार निश्चल सुंदर लगती है। ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है...  कभी मंदिर की घंटियों सी, कभी दूर कही उठती अजान लगती है। कभी परिन्दे की ऊँची उड़ान, तो कभी पंछी घायल बेजान लगती है। ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है...   कभी आँख से छलका आँसू, कभी होंठो पे तैरती मुस्कान लगती है।  कभी हवेली कोई शानदार, तो कभी खेतों में कच्चा मकान लगती है।  ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है...    कभी मीरा सी बैरागन, तो कभी राधा सी प्रेम दीवानी लगती है। कभी सड़कों पर फिरती आवारा सी, कभी लड़की खानदानी लगती है। ज़िन्दगी हर पल रंग बदलती सी लगती है...  कभी कंपकपाती सर्दियाँ, तो कभी हल्की खिली धूप लगती है। कभी बाग...

बेबीलोन में सबसे अमीर आदमी

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  Book Review – The Richest Man in Babylon

"आप "

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  "आप " राते खामोश थी, शायद दिन भी चुपचाप थे,  जिंदगी का असली मकसद सच कहूं तो आप थे।  घंटों जिन पर बाते करते ऐसे किस्से बेहिसाब थे,  रब ने जिनको हम तक भेजा, कोई और नही वो आप थे।  दिशा हीन थे शब्द भी सारे, अधूरी लिखी किताब थे,  जिसने इसको पूर्ण किया वह बाकी पन्ने आप थे।  आपके आने से पहले भी चल रही थी जिंदगी,  पर भला वह क्या जिंदगी जिसमें न शामिल आप थे ।  नजरिया बदला, अब हर छोटी बात को सोचूं,  वरना मसलों को लेकर हम बेतक्कलुफ़, हाजिरजवाब थे।  मिट्टी की दीवारे थी, बेरंग सा मेरा मकान बना था,  घर-बार मेरे को स्वर्ग बनाए, इतने काबिल आप थे ।  अलसायीं सुबहो को जिसे ख्वाबों में देखा ,  साथ मेरे यूँ बाहे थामे,वो धुंधला साया आप थे।    हमको खुद पर नाज है, जो किस्मत मे जनाब थे,  सुबह हुई और आँख खुली तो गरम चाय और आप थे।  ~~~~~~ ✒️✒️

चेहरे की चमक छुपा नहीं पाते हैं हम

 चेहरे की चमक छुपा नहीं पाते हैं हम, जब कभी ख़्यालों में तू उतरता है। शामो सुबह का भी अंदाजा नहीं रहता, वक़्त भी कुछ झूम कर गुज़रता है  इस तरह क्यो देखते हैं मुझे सब  दर्द से परेशान आदमी यूं ही बिखरता है    यादे तेरी जलती हुई शमा की तरह है मन भी अब पतंगे सा तवाफ़ करता है इक परिंदा है यूं ही उड़ता रह शान से तू  हर इक डाल पर ना जाने क्यों ठहरता है   बदला तो कुछ भी नजर नहीं आता अब भी, क्यू आज तू अपनी ही बात से मुकरता है   पहले तो कहते ना थके कि तू हमारा है, फिर आज क्यू तू ऐसे मुंह फेरे गुजरता है कुछ ज्यादा ही मासूमियत भरी थी दिल में कौन इस क़दर डूबकर प्यार करता है तवाफ़:- किसी चीज़ के चारों तरफ़ चक्कर लगाना।  ~~~~~~~~~~~~~~~~~~

"घर" by पियूष मिश्रा

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This song is like fine wine, never gets old. " घर " by Piyush Mishra.  The song is so damn effective, I get so lost in his voice!  can't focus on Lyrics and Everytime I try to  learn the  song, want to Remember the song but that is just not possible. This man is a Genius, how he pulls these words!!  Really unique style of writing. He must have been more  recognized than he is. ONE of the best song..so  deep,  amazing lyrics.  F rom start to e nd music... lyrics... voice efforts... feelings... goosebumps each n everything is at its peak just sit alone n  close your eyes n imagine every scene of the song... Thats called the real " sukoon"  This performance depicts that one doesn't need to be a  professional singer to sing a song beautifully. All you  need is to embrace the soul of the song.  Beautifully written and sung by one of the best underrated talent of india. Hats off to you Piyush Sir. Most versatile and talente...

ज़िन्दगी

 लोगो को देखने के नजरिये तो बदल, इस ज़िन्दगी को अब नया-सा मोड़ दे। कर भरोसा ऊपर वाले पर भी जरा, इस कश्ती को एक बार भंवर में छोड़ दे। ज़िन्दगी के इन सारे मसलों को देख कर, समय ले पर जरा हल कोई बेजोड़ दे। हौसले की इक नई इबारत तू लिख, बेवजह डर की सारी हदें अब तोड़ दे। इंसान की परख तो तू जानता ही है यहां, किसी नेक दिल से अब ये रिश्ता जोड़ दे। कब तक बर्दाश्त करेगा तू ज़ुल्मो सितम, अपने सोये ज़मीर को थोड़ा झिंझोड़ दे। जिसमें जीत कर भी केवल हार ही है, भला क्यों इस ज़िन्दगी को ऐसी होड़ दे। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~

बदला हुआ मैं

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 कहने को तो कांटो पर भी चल पड़ें थे कभी, तेरे इशारों पे यूं चलना नहीं आता मुझको। तेरी गलतियों को नादानी समझ लेता था, अब यूं नजरअंदाज करना नही आता मुझको। बड़ा वक़्त लगा है इन उसूलो को बनाने में, हालात के साथ इन्हे बदलना नहीं आता मुझको। वो पत्थर भी नहीं मै कि पिघल भी न सकूं, यूं मोम बनकर भी पिघलना नहीं आता मुझको। कीमती सामान भी राहो में खो जाये गर मुझसे, अफ़सोस में हाथ मलना नहीं आता मुझको ।। अब मत देखो तुम मुझे झील सी आँखों से, तैर जाऊंगा, अब डूबना नहीं आता मुझको। कई रातें भी जागकर बिताई है मैंने इंतजार में, झूठे सपनों पे नींदे लुटाना नहीं आता मुझको। नहीं होने वाला आग का कुछ असर मुझ पे, जलाओ कितना ही जलना नहीं आता मुझको। कोशिशें बहुत की कि ऐसे जाने ना दूं तुझे, अब ये झूठे रिश्ते निभाना नहीं आता मुझको। इक सबक ये भी था जिंदगी का सीखना बाकी, डरकर यादों में पीछे छूट जाना नहीं आता मुझको। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 📝

निकला था आज किसी से सुकून मांगने

 निकला था आज किसी से सुकून मांगने, वो खुद हाथ फैलाए खड़ा है उससे क्या माँगू। जो मंज़िल की तलाश में इधर-उधर भटक रहा, उसका हमसफ़र बनूँ या उससे सीधा पता माँगू। दर्द में वो और मैं दोनों ही नजर आते हैं, उसे मरहम दूँ या मैं अपने दर्द की दवा माँगू। खुद गमजदा होकर जो दूसरों के गम बांटे, उसके लिए दुआ माँगू या उससे दुआ माँगू। जिसकी ज़िन्दगी अंधेरों में कट रही हो, उसको चिराग दूँ या फिर उससे ही नूर माँगू। अरे इतना भी खुद-गर्ज नहीं है 'ये दिल' , दूसरों के दुख अनदेखा कर खुशी का दरिया माँगू। हैरान हूँ उस इन्सान की हस्ती देखकर, अब बस उसकी रूह से जुड़ने का जरिया मांगू। ~~~~~~~~~~~~~~

सिरहन सी दौड़ गई

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बाहर निकलते ही सिरहन सी दौड़ गई,  शायद आज मौसम में कुछ नमी सी है। दोनों ही तरफ खामोशी सी छाई है,  क्यो बर्फ़ रिश्तों में फिर जमी सी है। साथ सब हैं, चारों ओर लोग ही लोग हैं,  फिर क्यों सूनी महफ़िल है, कुछ कमी सी है। वक़्त बदलेगा करवट, चीज़े बदलेगी,  इसी इंतेज़ार मे साँसे थमी सी है। ख्वाब पूरे होने की आरजू है मन में,  लगती आज की शाम शबनमी सी है। कुछ पाया है बहुत कुछ खो कर अब तक,  हालत जीत कर भी हार चुके आदमी सी है। ________________

दुनिया में तो हंसता नजर आता है हर इंसान

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दुनिया में तो हंसता नजर आता है हर इंसान,  दिलों में तो दु:खो का ही आवास होगा।  रेगिस्तान में पानी नहीं हर तरफ रेत ही होगी, तुम्हे सिर्फ मरीचिका का आभास होगा । लाखों दर्द छिपाएं होंगे सीने में दुनियादारी के, पर दिखाने को चेहरों पर उल्लास होगा। पहचानना हो तो सबको सुनाना दुख अपना! सिर्फ तुम्हारा अपना ही तुम्हारे पास होगा। पहली बारिश जब मिलेगी बंजर धरती से, तब खत्म उसका निर्जला उपवास होगा। बातें इंसानियत की हो और तेरा ज़िक्र ना हो, ये तो सीधा मानवता का उपहास होगा। ये भोलापन ही है तुम्हारे शोषण का कारण! कहो तुम्हें कब इसका एहसास होगा। जिससे मिलता हूं तेरी ही बातें करता है यहां, जरूर तुझमें कुछ न कुछ ख़ास होगा। ~~~~~~~~~~~~~~~

तू किसी रेल सी गुज़रती है

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  तू किसी रेल सी गुज़रती है - Tu Kisi Rail Si Guzarti Hai Movie/Album: मसान (2015) Music By: इंडियन ओशन Lyrics By: वरुण ग्रोवर  Performed By: स्वानंद किरकिरे https://youtu.be/zpf8hrbT2d0 तू किसी रेल सी गुज़रती है मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ तू भले रत्ती भर ना सुनती हो मैं तेरा नाम बुदबुदाता हूँ किसी लम्बे सफर की रातों में तुझे अलाव सा जलाता हूँ काठ के ताले हैं, आँख पे डाले हैं उनमें इशारों की चाबियाँ लगा रात जो बाकी है, शाम से ताकी है नीयत में थोड़ी खराबियाँ लगा मैं हूँ पानी के बुलबुले जैसा तुझे सोचूँ तो फूट जाता हूँ तू किसी रेल सी गुज़रती है मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ Live concert version by INDIAN OCEAN'S Rahul Ram I watched Masaan  two days ago on Netflix and I can really say that it's a beautiful movie with all its implications and immersions in Indian society. its colors, joys, disappointments, hopes, arrivals and departures, but at the same time it touches all the people of our immense world. Great Movie, Great Songs, Great Talents, Great Voices. Greetings to all, ...

" ये न पूछिए मुझसे कि क्या कर रहा हूँ "

 ये न पूछिए मुझसे कि क्या कर रहा हूँ आज एक बार फिर कुछ नया लिख रहा हूँ भीड़ भरी सड़कों पर इस अनजान शहर में लोगो को आज कुछ अलग सा दिख रहा हूं बहुत खाये है धोखे हर मोड़ पर यहां दगाबाजो से फिर भी वफा कर रहा हूँ खत्म हुआ शराफ़त का किस्सा अब अपनी मासूमियत भी दफा कर रहा हूँ बनाते हो मुँह क्यों सिकोडी हैं भौंहें कहो क्या मैं कुछ बुरा कर रहा हूँ देखे हैं जो सपने कई रातों को जागकर मैं बस अब उन्हें ही पूरा कर रहा हूँ चल रहा था मैं खुद जिस उल्टे रास्ते इंसानियत के नाते दूसरों को मना कर रहा हूं इस खुदगर्ज दुनिया को देख कर लगता है इस ज़िन्दगी को बेवजह फना कर रहा हूं बुजुर्गों के कदमों में सिर को झुका कर दुआओं की ये दौलत जमा कर रहा हूँ जलकर ही सही दूसरों के काम आऊ इसीलिए अंदर की आग को शमा कर रहा हूं ~~~~~~~~~

"ख़्वाहिशें"

  कभी बैठ कर सोचता हूं तो ये लगता है कि मुश्किल तो हो गए कुछ काम आसान बाक़ी है उम्मीदें कायम है अभी हौसले ज़िंदा है बुलंदी पर पहुँचने का अभी अरमान बाक़ी है है दूर अब आदमी इंसानियत और नातों से इस मशीनी दौर में बस नाम का इंसान बाक़ी है सजा रखे हैं बहुत से रंगीन सपने इन आँखों में पर अब भी सजावट का बहुत सामान बाक़ी है गुजार सकु फुरसत के कुछ हसीं लम्हे उनके साथ ऐसे दर ओ दीवार, और वो मकान बाक़ी है कहाँ ले चल दिए लोग यू जनाजा उठा कर अभी तो धड़कता है दिल, अभी जान बाक़ी है सुनाता हूँ ज़रा ठहरो सच्चाई इस ज़िन्दगी की बहुत से दे दिए मगर कुछ इम्तेहान बाक़ी है अब भी कोई हैं जो उसूलों पर जो चलता हैं अब भी कुछ लोग हैं जिनके अभी ईमान बाक़ी है जानने लगे है अब मुझे भी लोग दुनिया में मगर ख़ुद से ख़ुद की इक पहचान अभी बाक़ी है

THE ART OF HAPPINESS

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Finished this book few days ago. actually I am not that kind of reader who read a religious book or the book who teaches about what is life , lessons and all . but I really surprised that I loved the book! This book taught me lessons about life , how to be happy , how to turn every negativity into positivity, how to handle a lot of things and the most important thing that I learnt from this book is discipline and how to be compassionate ! I am trying here to summarise this book in very few words... Hope you will like my effort.  THE ART OF HAPPINESS ~ by Dalai Lama & Howard Cutler BOOK SUMMARY    आमतौर पर हम सब खुशियां, अपने दोस्तों में, family में, office में, business में, यानी कि external factors में ढूंढते हैं। जबकि खुशियों का source, external नहीं internal होता है। लेकिन जब हमारा मन अशांत होता है। तो हमको खुशियां कहीं नहीं मिलती।       Happiness is a state of mind, जो internal factors से आती है, external से नहीं। इसलिए अगर mind को trained कर लिया ज...

बुरा है वो मगर इतना नहीं है

 सारी शिकायते आज यूँ ही दूर हो गई,  ख़ुश हूँ कि मुझे कोई शिक़वा नहीं है।  ना जाने दिल क्यू समझाने लगा है कि,  लगता हैं बुरा है वो मगर इतना नहीं है।  कुछ भी बोला नही वो मुझसे पूछने पर भी,  मुझे यकीन क्यू मगर कि वो झूठा नहीं है।  गलतफहमियां ही थी जो दूरी आयी थी,  वो मानता है कि ये रिश्ता अभी टूटा नही हैं।  आँखें तो हर पल तकती थी दरवाजे को,  ये तो दोस्त बताते थे कि वो आया नही है।  उसके बिना कुछ यूँ लगता था कि,  कड़ी धूप में साथ मेरा साया नही है।  दिलों के रिश्तों में मुश्किल है बस ये,  इसे कोई अपना लगा तो छुटता नहीं है।  मुहब्बत कुछ इस क़दर हो गई थी उससे कि तन्हाई में भी लगता था, तन्हा नहीं है।  चल क्यु ना चले जाए किसी ऐसी जगह,  जहाँ इस रिश्ते पर दुनिया का पहरा नहीं है।  तु आ गया है ना, मरहम की जरूरत नहीं,  कि दिल पर लगा जख्म गहरा नही है।  _______________

"सोच"

 तुम सोच रहे थे बस, रेगिस्तानों के वीरानो तक, मेरी तो नजरे हैं बरसते बादलों के ठिकानों तक। साज तो हवा के झोंके, पानी के बहाव में भी है, लोग क्यों उलझे रहते है ग़ज़लों और तरानों तक। कुछ तो मिट्टी के सौंधेपन, फूलों की महक में है, जो खींच लाती हैं हमें आज भी बागबानों तक। सबके सपनों की एक लम्बी कहानी होती है, शीशे के महलो से लेकर मिट्टी के मकानों तक। एक ऎसी अदालत भी है, जो ईमान परखती है, सिमटी नहीं रहती सिर्फ़ गवाहों और बयानों तक। ये दिल समझा नहीं करता अहसासों की बोली को,  नहीं लाना चाहते हम लफ़्ज़ों को ज़ुबानों तक। हर वक़्त हवाओं में, महसूस तो करोगे तुम, ये प्यार की ख़ुशबू है जनाब, महकेंगी ज़मानों तक। ~~~~~~~~~~

"वक़्त"

  ये वक्त है साहब, कोई छोटा बच्चा नहीं, आंखे दिखाओगे तो रुक जाएगा, सहम जाएगा।  समंदर की रेत है वक़्त  नदी का पानी है,  जितनी मुट्ठी भिचोंगे, तेजी से फिसलता जाएगा। वक़्त और घाव का नाता तो जरा देखो वक़्त के साथ भर जाएगा, या नासूर बन जाएगा। ये वक़्त है बड़ा बलवान, जानोगे एक दिन, जब ये राजा को रंक और रंक को राजा बनाएगा। वक़्त की अहमियत भी समझ जाओगे, जब कोई अपना आपके वक्त को तरस जाएगा। इसी वक़्त की कीमत उससे भी पूछना, जो कुछ दिन बाद इस दुनिया को छोड़ जाएगा। वक़्त , देखो इसे यह बीतता ही चल रहा है, तुम्हे क्या लगता है, यह फिर वापस नहीं आएगा। जिसने सोचा वक़्त के विपरीत जाना है, वो बदलाव के तूफान में कहीं पीछे छूट जाएगा। रिश्तों की मजबूती भी वक़्त परखता है, बुरे वक़्त में देखो केवल अपना ही साथ निभाएगा। वक़्त बड़ा खूबसूरत है कहोगे आप ये भी, जब कोई अजीज आपके साथ ये वक़्त बिताएगा। ~~~~~~~~~~~